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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सबसे बड़ा झूठ

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सबसे बड़ा झूठ दुनिया का सबसे बड़ा झूठ जानते हो क्या है? हम रोज अच्छी बातें पढ़ते हैं, कुछ लोग तो सत्संग भी सुनते हैं, महापुरुषों के विचार पढ़ते हैं और अच्छे लोगों से मिलकर ज्ञान की बातें भी सीखते हैं। लेकिन क्या इन सब से हमारे जीवन में बदलाव आएगा? हम सोचते हैं कि किसी महापुरुष की बातें सुनने से या अच्छी किताबें पढ़ने से हमारे जीवन में बदलाव आ जायेगा तो इससे बड़ा झूठ और इससे बड़ा भ्रम दुनिया में कोई दूसरा नहीं है। कोई आएगा और हमें कुछ बातें बताएगा और हम बदल जायेंगे, ये एक भ्रम ही तो है। अगर किसी के कहने से दुनिया बदल जाती तो भगवान को बार बार धरती पर जन्म क्यों लेना पड़ता? एक राम ही काफी थे.. एक कृष्ण ही काफी थे.. या एक महावीर ही काफी थे.. या एक बुद्ध ही काफी थे.. लेकिन सच तो ये है कि आपको खुद अपने आप को बदलना है। आप क्या पढ़ते हो ? क्या देखते हो ? क्या सुनते हो ? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है कि आप किस बात को अपने जीवन में उतारते हो। आप जिस बात को अपनाओगे वैसे ही हो जाओगे। बुद्ध में और आप में कोई फर्क नहीं है। जो ईश्वर महात्मा बुद्ध के अंदर था वही आपमें है। वही प्...

शेख चिल्ली के खयाली पुलाव

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शेख चिल्ली के खयाली पुलाव एक दिन सुबह-सुबह मियां शेख चिल्ली बाज़ार (gone to market) पहुँच गए। बाज़ार से उन्होने अंडे खरीदे (bought eggs) और उन अंडों को एक टोकरी नें भर कर अपने सिर (on head) पर रख लिया, फिर वह घर (house) की ओर जाने लगे। घर जाते-जाते उन्हे खयाल आया कि अगर इन अंडों से बच्चे (chickens from eggs) निकलें तो मेरे पास ढेर सारी मुर्गियाँ होंगी। वह सब मुर्गियाँ (so many hens) ढेर सारे अंडे देंगी। उन अंडों को बाज़ार में बैच कर मै धनवान (rich) बन जाऊंगा। अमीर बन जाने के बाद मै एक नौकर (employee) रखूँगा जो मेरे लिए शॉपिंग कर लाएगा। उसके बाद में अपनें लिए एक महल जैसा आलीशान घर (big house) बनवाऊंगा। उस बड़े से घर में हर प्रकार की भव्य सुख-सुविधा (all type of facility) होंगी। भोजन (for eating) करने के लिए, आराम करने के लिए और बैठने (for sitting) के लिए उसमें अलग-अलग कमरे होंगे। घर सजा लेने के बाद मैं एक गुणवान, रूपवान और धनवान लड़की (amrry with a girl) से शादी करूंगा। अपनी पत्नी के लिए भी एक नौकर रखूँगा और उसके लिए अच्छे-अच्छे कपड़े, गहने (jewelry) वगैरह ख़रीदूँगा। शादी के बाद मेरे...

मानो गुरू की सीख

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मानो गुरू की सीख नारायण दास एक कुशल मूर्तिकार थे। उनकी बनाई मूर्तियां दूर दूर तक मशहूर थीं। नारायण दास को बस एक ही दुख था कि उनके कोई संतान नहीं थी। उन्हें हमेशा चिंता रहती थी कि उनके मरने के बाद उनकी कला की विरासत कौन संभालेगा। एक दिन उनके दरवाजे पर चौदह साल का एक बालक आया। उस समय नारायण दास खाना खा रहे थे। लड़के की ललचाई आंखों से वे समझ गए कि बेचारा भूखा है। उन्होंने उसे भरपेट भोजन कराया। फिर उसका परिचय पूछा। लड़के ने कहा कि गांव में हैजा फैलने से उसके माता पिता और छोटी बहन मर गई। वह अनाथ है। नारायण दास को उस पर दया आ गई। उन्होंने उसे अपने पास रख लिया। लड़के का नाम था कलाधर। वह मन लगाकार उनकी सेवा करता। काम से छुटृी पाते ही उनके पैर दबाता। नारायण दास द्वारा बनाई जा रही मूर्तियों को ध्यान से देखता। कई बार वह बाहर से पत्थर ले आता और उस पर छैनी हथौड़ी चलाता। एक दिन नारायण दास ने उसे ऐसा करते देखा तो समझ गए कि बच्चे में लगन है। उनकी चिंता का समाधान हो गया। उन्होंने तय कर लिया कि वे अपनी कला इस बालक को दे जाएंगे। उन्होंने तय कर लिया कि वे अपनी कला इस बालक को दे जाएंगे। उन्होंने...

बीस हज़ार का चक्कर

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बीस हज़ार का चक्कर एक बार एक व्यक्ति कुछ पैसे निकलवाने के लिए बैंक में गया। जैसे ही कैशियर ने पेमेंट दी कस्टमर ने चुपचाप उसे अपने बैग में रखा और चल दिया। उसने एक लाख चालीस हज़ार रुपए निकलवाए थे। उसे पता था कि कैशियर ने ग़लती से एक लाख चालीस हज़ार रुपए देने के बजाय एक लाख साठ हज़ार रुपए उसे दे दिए हैं लेकिन उसने ये आभास कराते हुए कि उसने पैसे गिने ही नहीं और कैशियर की ईमानदारी पर उसे पूरा भरोसा है चुपचाप पैसे रख लिए। इसमें उसका कोई दोष था या नहीं लेकिन पैसे बैग में रखते ही 20,000 अतिरिक्त रुपयों को लेकर उसके मन में  उधेड़ -बुन शुरू हो गई। एक बार उसके मन में आया कि फालतू पैसे वापस लौटा दे लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि जब मैं ग़लती से किसी को अधिक पेमेंट कर देता हूँ तो मुझे कौन लौटाने आता है??? बार-बार मन में आया कि पैसे लौटा दे लेकिन हर बार दिमाग कोई न कोई बहाना या कोई न कोई वजह दे देता पैसे न लौटाने की। लेकिन इसनान के अन्दर सिर्फ दिमाग ही तो नहीं होता… दिल और अंतरात्मा भी तो होती है… रह-रह कर उसके अंदर से आवाज़ आ रही थी कि तुम किसी की ग़लती से फ़ायदा उठाने से नहीं चूकते और ऊपर...

ईश्वर कि मर्जी पर रहे खुश

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ईश्वर कि मर्जी पर रहे खुश एक बच्चा अपनी माँ के साथ खरदारी करने एक दुकान पर गया तो दुकानदार ने उसका मासूम चेहरा देख कर टोफियो का डिब्बा खोला और उसे आगे करके कहा,’लो जितनी चाहे टोफिया ले लो | लेकिन बच्चे ने उसे बेहद शालीनता से मना कर दिया | दुकानदार ने दुबारा कहा लेकिन बच्चे ने खुद टोफिया नहीं ली | बच्चे कि माँ ने बच्चे को टोफिया ले लेने के लिए कहा | लेकिन बच्चे ने खुद टोफिया लेने के बजाए दुकानदार के आगे हाथ फेला दिया और कहा,’आप खुद ही देदो अंकल|’ दुकानदार ने टोफिया निकलकर उसे देदी तो बच्चे ने दोनों जेंबो में दाल ली | वापस आते वक्त उसकी माँ ने पुचा कि ‘जब दुकानदार ने डिब्बा आगे किया तब टॉफी क्यों नहीं ली और उन्होंने खुद निकलकर दी तब ले ली ? इसका क्या मतलब ?’ बच्चे ने बड़े मासूमियत से जवाब दिया कि ‘माँ मेरे हाथ छोटे हैं खुद निकलता तो एक या दो टोफिया आती | अंकल के हाथ बड़े थे, उन्होंने निकली तो देखो कितनी सारी मिल गई’ ठीक इसी तरह हमें उस ईश्वर कि मर्जी में खुश रहना चाहिए | क्या पता वह किसी दिन हमें पूरा सागर देना चाहता हो और हम अज्ञानतावश बस एक चम्मच लिए ही खड़े हो |...